Thursday, February 10, 2011

कुछ पूछना था तुमसे यार

आमा मियां , सुनो तो बरखुरदार..
कुछ पूछना है, जानाना है  तुम्हारा विचार..
चरस , गंजा, इन सब से रही अनजान..
लत क्या होती है नहीं था ज्ञान...

पर आज बहुत हिम्मत की है,
दुनिया से एक छुपी बात करनी है...
लत लग चुकी है मुझको यार,
face book का चढ़ गया है मुझे बुखार..

कहाँ तो नज़र न आना सालों तक,
पर रोज़ तुम्हारे update में हैं हम अब....
क्या तुम्हारी भी येही स्तिथि है ??????
इसमें किसकी गलती है...???

सोंच रही थी FB को letter लिखूं ,
या legal notice का करदूं एलान ..????
चार साल पहले शादी की थी,
पर आज लगता है laptop से हुयीथी...!!!

हर एक घंटे में notification का है इंतज़ार ,
रोज़ आज कल कविता करती हूँ atleast चार...
फिर comment की भी आशा रखती हूँ हर बार,
PHEW!
I know this is totally too much यार,
कहा था न FB ka chada hai bukhar...

जानती नहीं क्या है सार,
FB है या तुमसे जुडने का है ख़याल...??
पर लगता FB बहाना है,
तुमसे बस यह कहना है....
its because of you am addicted सरकार
This poem is dedicated to all of you yaar!!!
-------------------------- ;) love havisha/ chuttus/ neetu


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