Saturday, February 19, 2011

Chai..

छुट्टी है ...और आँखों में अभी भी नींद है.
ठंडी ठंडी सुबह में हलकी हलकी धुप है..
उबासी लेते हुये आलस की चपेट में 
चाय की मन में उठती तलब है
पानी, दूध, थोड़ी शक्कर जादा ,
घस्सा हुआ अदरक चाहे जितना चाहा...
फिर चुस्क्कियूं से भरा गरम गरम प्याला..
वाह री चाय सुबह का रंग बदल डाला..






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