Wednesday, February 9, 2011

इन्तिज़ार....

आज रोको न मुझे ,दिल भर जो आया है...
समझाना तो न होगा,न बयां ही होगा हमसे...
सियाही में ही ढाल सकूं ,गनीमत होगी खुद पे..
एक टीस सी उठी थी ,तुझे जाता देख दिल में...
आज उसी टीस ने फिर सर उठाया है ..
आज रोको न मुझे ,दिल भर जो आया है......

यह इन्तिज़ार भी क्या बाला है , दर्द में मिठास सा जग आया है..
की हर जाता लम्हा , तुझे मेरे और करीब ले आया है.....
आंखें नम हैं ज़रूर , पर होंठों पर मुस्कान ने फ़रमाया है ..
बस कुछ पल और, और वो लौटने वाला है....
आज रोको न मुझे , दिल भर जो आया है.....

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