Friday, July 31, 2020

Fleeting moments

Trying to capture time,
In fleeting moments of glee..
Not even a size of spec are we!
How high and low we still get to feel?
Not even a spec...not even a spec... are we!

My eyes limit me to my scope..
But mind sees beyond this scope..
Letting me free..free... free..
How I always wanted to be.. ⭐

#mommydottydairy just being in the moment
#havvishakarrihaloo
#selfcomposition


Wednesday, July 29, 2020

Chand.

दूर की चमक पर दुनिया रश्क करती है..
चमक में छिपे दागों से अनजान रहती है!
तेरी ज़मीन तू ही जाने,
यह  दाग कौन सी कहानी बयान करते हैं !

बेफ़िक्रे हम, गुस्ताख़ हो चले हैं..
तुम्हारा गम समझाने चले हैं !
जाम की क्या ज़रुरत उन्हें, 
जो तुम्हें देख नशे में पढ़ रहे हैं..

Havvisha karrihaloo

7/29/2020

Monday, July 6, 2020

Waqt ki peshgi-निशब्द

निशब्द

कभी कभी वक़्त ऐसे  पेश आता है,
जैसे उसकी मेरी कोई  पहचान नहीं!
बेतकल्लुफ होके  कुछ भी थमा जाता है;
जैसे उसको मेरा ज्ञान ही नहीं!

हर बार नयी कहानी  लिखती हूँ ,
और बीच  लिखावट किताब खींच  ले जाता है?
 नाराज़गी से मैंने पुछा,"अरे! कहानी पूरी तो होने दे?
सिहाई अभी सुखी नहीं है मेरी, एक कथा तो पूरी करने दे!"

वक़्त बे रुके फ़रमाया,"समय  ख़राब न कर,
 जो दिया है उस पर काम कर।
 कहानी अधूरी थी यह किसने कहा ?
 यहीं तक की  सीख थी तो खींच लिया।"

लिखावट की लम्बाई का गम न कर,
सिहाई बाकि है तो बस लिखती चल...
हर बार तुझे नया पन्ना थमा जाता हूँ,
कई ऐसे  भी है..जिनको  बिना पन्ने  छोड़ आता हूँ।

तू  रच रही है इसका भ्रम न कर
सोने की लंका न छोड़ी,न बक्शी कृष्ण की द्वारिका...
यह मेरा रचा चक्रव्यूह ,तू सिर्फ उसकी नायिका...

हर बार इस तरह क्यों स्तब्ध कर जाता है?
बेतकल्लुफ होके  कुछ भी थमा जाता है !

#mommydottydairy penning life

havvishakarrihaloo