Wednesday, July 31, 2019

"जो होगा अच्छा ही होगा"

ना पूछो मुझसे सही-गलत,
यह भेद है धुंधला, नहीं सहज।

न पूछो पुनरावृत - "अब क्या होगा?"
मुझे  ज्ञात नहीं भविष्य का लेखा।

कर्तव्य निष्ट, मैं  कर्म भद्द,
जो होगा अच्छा ही होगा।

निष्ठुर नियति की झोली से,
निष्चित ही भाग्योदय होगा।

यह चक्रवात केवल क्षणभर,
तुम वीर अधीर किंचित ना होना।

भयहीन ह्रदय की तीव्र चेतना,
से तय है नव अंकुर प्रफुल्लित होना।  

यह परिक्षा विश्वास की केवल,
अडिग, अचल, विनम्र बस रहना।

क्या होगा यह भय ना कर ,
जो होगा अच्छा ही होगा।


हवविषा काररिहलू


























Friday, July 12, 2019

आत्मसमर्पण

क्या सोंचू ,क्या है अब बाकी,
शुष्क भूमी वर्षा अभिलाषी।
आशा का अंकुर ह्रदय संजोये ,
प्रतीक्षा कर रही मेघ कब रोए।

हर संभव प्रयास कर जोए
प्रतीक्षा ही बस रहे अब जो है,
ऐसे क्षण में आत्मसमर्पण ,
आत्मसमर्पण, आत्मसमर्पण।

जब तक है सांसों का संग्रह,
दर्शक बन  कर आत्मसमर्पण।
द्रिड, स्थिर, अचल,अडिग, अविचल  मन..  
आत्मसमर्पण आत्मसमर्पण।