ना पूछो मुझसे सही-गलत,
यह भेद है धुंधला, नहीं सहज।
न पूछो पुनरावृत - "अब क्या होगा?"
मुझे ज्ञात नहीं भविष्य का लेखा।
कर्तव्य निष्ट, मैं कर्म भद्द,
जो होगा अच्छा ही होगा।
निष्ठुर नियति की झोली से,
निष्चित ही भाग्योदय होगा।
यह चक्रवात केवल क्षणभर,
तुम वीर अधीर किंचित ना होना।
भयहीन ह्रदय की तीव्र चेतना,
से तय है नव अंकुर प्रफुल्लित होना।
यह परिक्षा विश्वास की केवल,
अडिग, अचल, विनम्र बस रहना।
क्या होगा यह भय ना कर ,
जो होगा अच्छा ही होगा।
हवविषा काररिहलू
यह भेद है धुंधला, नहीं सहज।
न पूछो पुनरावृत - "अब क्या होगा?"
मुझे ज्ञात नहीं भविष्य का लेखा।
कर्तव्य निष्ट, मैं कर्म भद्द,
जो होगा अच्छा ही होगा।
निष्ठुर नियति की झोली से,
निष्चित ही भाग्योदय होगा।
यह चक्रवात केवल क्षणभर,
तुम वीर अधीर किंचित ना होना।
भयहीन ह्रदय की तीव्र चेतना,
से तय है नव अंकुर प्रफुल्लित होना।
यह परिक्षा विश्वास की केवल,
अडिग, अचल, विनम्र बस रहना।
क्या होगा यह भय ना कर ,
जो होगा अच्छा ही होगा।
हवविषा काररिहलू