Wednesday, October 30, 2019

जाने क्या है तुम में ?

जाने क्या है तुम में , जो मैं पिघल जाती हूँ ?
तुम्हारी चाह पूरा करने में जुट जाती हूँ !

खाना बनाना तो आता नहीं , पर तुम्हारे Critic झेल जाती हूँ !
ऐसा क्यों है कि तुम्हारी पसंद का हो ,इसी में जुट जाती हूँ ?

कुछ ज़ादा जो की आना कानी , दो हाथ भी लगा जाती हूँ।
फिर देर रात तक सिर्फ करवट बदलती रह जाती हूँ !
ऐसा  क्यों  है कि बाद में सौ नहीं पाती हूँ ?
जाने क्या है तुम में , जो मैं पिघल जाती हूँ ?

Mumma यह , Mumma वोह , मेरे कान खा जाती हो !
एक बार में सुन लो, ऐसा ख्वाब में भी नहीं कर पाती हो ?
फिर भी सौ बार दोहराती मैं पीछे पीछे भागी आती हूँ !
ऐसा क्या है तुम में , जो मैं पिघल जाती हूँ ?

थकी हारी शाम को तुमको जब लेने आती हूँ
अपनी आवाज़ से थकावट को जीत में बदल जाती हो !
तुम्हारा दिन कैसा बीता सुंनने में लग जाती हूँ !
ऐसा क्या है तुम में जो मैं सब भूल जाती हूँ !

Liza ने ऐसा किया और  Jordan ने वैसा,
मैं सबसे सच्ची हूँ, बाकी ऐसे का तैसा !
चुप चाप सुनती  रोज़ मैं तेरी सारी कहानियाँ ,
ऐसा क्या है तुम में की बस  मुस्कुराती रह जाती हूँ।

"क्या Magic सच है Mumma ?" ,
अजीब गरीब सवाल दोहराती हो !
हाँ Magic सच है मेरी माँ,
इसलिये तो जवाब न होते हुए भी
मैं हर बार पिघल जाती हूँ !

यह जो भी है तुझमें , वह हर रोज़ जीना चाहती हूँ
तेरी एक मुस्कराहट के लिये नौटंकी बन जाती हूँ!
यह MAgic ही तो है  जो  मैं पिघल जाती हूँ..
तुझको हर ख़ुशी दे सकूं इसी में लग जाती हूँ

जाने क्या है तुम में , जो मैं पिघल जाती हूँ ?






Friday, October 11, 2019

ना होता वोह तो..


अर्ज़ किया है---

ना होता वोह तो भी आज होता, मगर ऐसा ना होता..
ज़िन्दगी के जज़्बातों में  शायद एक पन्ना उधार  होता।

किसी का होना, ना होना, बेशक अपने हाथ नहीं ,
मगर ज़िन्दगी कोई बेतुका इतिफाक नहीं।

हर पन्ने पर एक सीख दर्ज होती है ,
कभी ख़ुशी के नाम, कभी गम की शाम होती है।

वोह ना होता तो कोई और होता ...
मगर  जो होना है वह  तो  होके  रहता।

वोह नहीं डूबाता, तो तुम खुद डूब जाते
जब तैर कर जीतना है नसीब ,
तो डूबने के सौ और ज़रिये सामने आते।

क्या हुआ क्यों हुआ ,यह गम ना कर..
क्या सीखा, क्या बटोरा, मुसाफिर इल्म कर।

देख तेरी गठरी एक बार फिर टटोल  कर ,
हर रंग के काँचे ,ले चला तू बटोर कर..

दोस्त, वोह होता, तो भी आज होता,
पर ज़िन्दगी की सीख में एक पन्ना ज़रूर उधार होता। 

-----हविषा




I KID YOU NOT

Of all the prized possessions I keep,
Freedom is the closest to me...
Expression in action and not just in thoughts..
Boy did I bruise? You bet! I lost count..

I played what felt like was best,
With cards I was dealt with...
Felt like a rookie in every new game
Retrospect...a lot could've changed
While in the moment..things are never sane..

Hear me now.. and hear me clear...

When you see regret showing its face
Dust off your pants and pull back your mane.
That's the best you could've done
Given the uncertainty of this game.

You played well...I KID YOU NOT!
Regret makes you live in past,
Focus on NOW that is all you got..
Curtains are drawn on role play of past

Your current role is all you got!
Don't sweat the bruises
only a player gets them all.
Be rather a player
than a by stander in stall.

Your game has improved
you better not stop..
You shall play very well..
I KID YOU NOT..!!!