अर्ज़ सुनो मैं हारी हुई हूँ ,जग के पालन हारे।
रह -रह कर मन डर जाता है ,राह न सूझे काही।
आयी तेरे द्वारे भगवन ,न्याय तेरा परखने।
हक़ है इतना मेरा तुमपर ,लाज रखो मेरी,साईं।
सही गलत की क्या परिभाषा मेरी समझ न आई।
तुम बिन मेरा कौन सहारा , आज प्रकटो मेरे भाई।
कुरक्षेत्र बना मेरा जीवन , कुछ और न सूझे उपाय।
काश बहु बल की होती लड़ाई, पर मन ने है चोंट खाई।
सारथि बन मेरे जीवन का कर उधार मेरे साईं
एक युद्ध अर्जुन ने लड़ा था , आज मेरी बारी है आई।
पार्थ बना लो मुझको अपना,शरणागत मैं तेरे कन्हाई।
तुझ बिन मेरा कौन सहारा , आज प्रकट मेरे भाई।
रह -रह कर मन डर जाता है ,राह न सूझे काही।
आयी तेरे द्वारे भगवन ,न्याय तेरा परखने।
हक़ है इतना मेरा तुमपर ,लाज रखो मेरी,साईं।
सही गलत की क्या परिभाषा मेरी समझ न आई।
तुम बिन मेरा कौन सहारा , आज प्रकटो मेरे भाई।
कुरक्षेत्र बना मेरा जीवन , कुछ और न सूझे उपाय।
काश बहु बल की होती लड़ाई, पर मन ने है चोंट खाई।
सारथि बन मेरे जीवन का कर उधार मेरे साईं
एक युद्ध अर्जुन ने लड़ा था , आज मेरी बारी है आई।
पार्थ बना लो मुझको अपना,शरणागत मैं तेरे कन्हाई।
तुझ बिन मेरा कौन सहारा , आज प्रकट मेरे भाई।
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