Friday, September 20, 2019

अपने पंखों में जो भर ली उड़ान है

उड़ते पन्नों की खुली सी यह किताब है,
कुछ कहा, कुछ सुना, फिर लिखा एक ख्वाब है...

दायरों में भंधना कहाँ मेरा मुक़ाम है ,
गीले पंखों के सूखने का इंतज़ार है..

उड़ान भरने को मेरे ख्वाब  तैयार हैं,
बेधड़क सा एहसास दिल पे सवार है...

न जीत का लालच , न हार का ख़याल है,
एक बेखोफ सी कोशिश करने को बेक़रार है। ..

एक नयी कहानी नए पन्ने  पर उभरने को तैयार है,
दिन है या रात इसका किसको एहसास है...

कुछ कहा, कुछ सुना , अब पूरा हुआ यह ख्वाब है..
अपने  पंखों में जो भर ली उड़ान है....



sep 19 2019














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