Friday, August 14, 2020

Desh mere

 देश मरे मैं जहाँ रहूँ,

तेरी मिटटी मेरे संग चले.

तेरी सेवा कर मैं सकूं,

चाहे कोई भी भेष में.


आबाद तू, खुश हाल तू,

सदा रहे तेरी गरिमा,

लाखों आये, षड़यंत्र रचा, 

पर काम न हुयी तेरी महिमा !


यूँ तो है ह्रदय बसा मोक्षार्थी होने का सपना ..

पर तेरी गरिमा वृद्धि का यदि एक अंश भी बन सकूं 

तो स्वीकार है सौ और जनम मुझे लेना..


जय हिन्द !


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