Wednesday, April 22, 2020

क्षमा शारदे क्षमा।

क्षमा शारदे क्षमा, क्षमा शारदे क्षमा,
तू रूठी है कुछ तो हुई है खता
जहाँ मैं रहूँ  हो तेरा आसरा,
तेरी मिटटी से पर यूँ ना कर तू जुदा ।
क्षमा शारदे क्षमा।

वो दरीचे से तेरी सहर देखना,
शंकराचार्य का मंदिर है आँखों बसा।
तेरी गोदी की झीलों में घूमना,
चश्मिशायी के पानी में खेलना।

नहीं जानती क्यों मिली ये  सज़ा ,
तू रूठी है कुछ तो हुई है खता।
तुझ पर चली जब गोलियाँ ,
न कुछ कर सकी सब हुआ जब धुआँ।
मैं छोटी थी तब नहीं था पता,
दिल में है आज खंजर गड़ा।
क्षमा शारदे क्षमा,क्षमा शारदे क्षमा।

लौटा तेरा आँचल माँ ,
हम बिखरे पड़े हैं यहाँ -वहाँ ।
तेरी वादी में शैतान है घूम रहा,
आ उसका अंत करने तो आ।
जहाँ मैं रहूँ  हो तेरा आसरा,
तेरी मिटटी से पर यूँ  न कर तू जुदा ।
क्षमा शारदे क्षमा, क्षमा शारदे क्षमा।


Havvisha Karrihaloo




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