अबके जब बुलाओगे, तो हम ना लौटेंगें
आँसू जो बहाओगे, तो हम ना पोंछेंगे।
ना दर्द है , ना रंजिश कोई, रही बाकी ,
जो टीस सुलगती थी, वोह अब ना रही वैसी ।
राख हुए रिश्ते को किस हक़ से सेहलाओगे ?
अब के जो पलटे तो हमें नहीं पाओगे।
टूटे कांच की तस्वीर बस जोड़ते नज़र आओगे,
आज़ाद होकर भी खुद को कैद में तुम पाओगे।
ज़िन्दगी को तलाशते तुम ज़रुर आओगे,
चाह कर भी तुम मुझ तक पर पहुंच नहीं पाओगे।
अबके जो लौटे तो हमे नहीं पाओगे ,
सिर्फ आँखों में आंसू और दिल भोज लिये रह जाओगे
अबके जो लौटे तो हमे नहीं पाओगे।
--------- हविषा करिहलू
चाह कर भी तुम मुझ तक पर पहुंच नहीं पाओगे।
अबके जो लौटे तो हमे नहीं पाओगे ,
सिर्फ आँखों में आंसू और दिल भोज लिये रह जाओगे
अबके जो लौटे तो हमे नहीं पाओगे।
--------- हविषा करिहलू
No comments:
Post a Comment